सशस्त्र बलों के ऐसे सभी सदस्य, जो युद्ध/लड़ाई में, विकलांग या विकल होने के कारण सेवा से बाहर हुए हों अथवा उन्हें सेवा में बरकरार रखा गया हो, उनकी और उनके आश्रितों की मदद करने के उद्देश्य से विकल युद्धवीर/डिसेबल्‍ड वार वेटरन्‍स (इंडिया) का गठन किया गया है।

परिचय

डिसेबल्ड- वार वेटरन्स (इंडिया) (विकल युद्धवीर) अथवा डिवावे ( DIWAVE) को वर्ष 1978 में सोसायटी के रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड किया गया था, जो रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त तीन संगठनों में से एक है। युद्ध में हुई विकलांगता/लड़ाई में हताहत होने वाले सैनिकों का यह गैर-राजनीतिक‍, प्रजातांत्रिक, धर्म निरपेक्ष एवं स्वैच्छिक संगठन है। डिवावे( DIWAVE) का गठन मूल रूप से युद्ध / लड़ाई में हताहत सशस्त्रबलों के कल्याण हेतु भारत सरकार द्वारा स्वीकृत देय हक दिलवाने के साथ-साथ उनके कल्याण हेतु उपाय सुझाने के उद्देश्य् से गठित किया गया था।



उद्देश्य (AIM)

सशस्त्र बलों के ऐसे सभी सदस्य, जो युद्ध/लड़ाई में, विकलांग या विकल होने के कारण सेवा से बाहर हुए हों अथवा उन्हें सेवा में बरकरार रखा गया हो, उनकी और उनके आश्रितों की मदद करने के उद्देश्य से विकल युद्धवीर/डिसेबल्‍ड वार वेटरन्‍स (इंडिया) का गठन किया गया है।

 

कुछ लक्ष्य (SOME OBJECTIVE)

  • भारत सरकार / राज्य सरकारों और अन्य सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों / संगठनों के साथ तालमेल रखते हुए युद्ध में विकलांग/विकल सैनिकों की पेंशन एवं संबद्ध मामलों में सहयोग करना और मार्गदर्शन देना।
  • सेवा-उपरांत जीवन में पुनर्वास हेतु सहायता एवं मार्गदर्शन, ताकि समाज में उन्हें उपयोगी स्थान पुन: मिल सके।
  • विकलांग/विकल सैनिकों अथवा मृत सैनिकों के आश्रितों को अच्छी शिक्षा आदि उपलब्ध करवाने में सहायता करना।
  • अधिकारियों के साथ तालमेल से युद्ध में विकलांग/विकल सैनिकों एवं उनके परिजनों को समुचित चिकित्सा देखभाल के साथ-साथ जरूरी होने पर शारीरिक पुनर्वास हेतु मदद सुनिश्चित करना।
  • सैनिकों की सेवाकाल में भूमिका और सेवा के बाद के जीवन के बारे में वार डिवावे द्वारा सेमिनार, समय-समय पर आवधिक सम्मेलन, प्रदर्शनी आदि का आयोजन कर जनता को शिक्षित करने का प्रयास करना।
  • आने वाले दिनों में डिवावे की राज्यो इकाइयों/निकायों का देशभर में गठन करते हुए उपरोक्त लक्ष्यों और उद्देश्यों को बढ़ावा देना।
  • डिवावे के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को आगे बढ़ाने हेतु विधिक साधनों से नकद या वस्तु के माध्यम से अंशदान(सबस्क्रिप्शन), दान आदि लेना।
  • ऐसे विधिक कार्य करना, जो डिवावे के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनुकूल हो।

about me

संपर्क विवरण (CONTACT DETAIL)

पता (ADDRESS)

संगठन का नाम : विकल युद्धवीर (इंडिया) रजिस्टर्ड (Disabled War Veterans(India) Regd.
कार्यालय का पता : C6-18/1, सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया, हौज खास (टेलीफोन एक्स चेंज के पीछे), नई दिल्लीव-16
दूरभाष : 011-41315492
टेली / फैक्स : 011-41315492 / 0124-4051572
ईमेल : diwave1@gmail.com

संपर्क

कर्नल एच एन हांडा संरक्षक और अध्यक्ष गवर्निंग बॉडी 9811920190
एम्बेसडर सतनामजीत सिंह         संरक्षक 9818580822
श्रीमती करुणा पंडित W/O मेजर विजय कुमार VrC    संरक्षक

9810287034

कैप्टन एन के महाजन      अध्यक्ष 9811199367



ऑफिस: पाप्री गुहा
फोन: 011-41315492

हमसे मुलाकात करने के सभी इच्छुक हर व्यक्ति का हार्दिक स्वागत है। कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक प्रतिदिन खुला रहता है।

बैंक संबंधी विवरण (BANK DETAILS)

आईसीआईसीआई बैंक, डीएलएफ सिटी कुतुब प्लाजा ब्रांच, डीएलएफ सिटी, फेज 1, गुड़गांव 122002
खाता संख्या : 629101103338, खाताधारक का नाम "Disabled war Veterans(India)"
आईएफएससी कोड : ICIC0000177

एवं

सिंडिकेट बैंक, हौज खास शाखा, नई दिल्ली
खाता संख्या : 90302010047577
आईएफएससीकोड : SYNB0009049

सदस्यता विवरण (MEMBERSHIP DETAIL)

सदस्यता शुल्क, एक बार का अंशदान(सबस्क्रिप्शन) तथा वार्षिक चंदे संबंधी विवरण की निम्न सिफारिश(Recommend) की जाती है।

  • प्राथमिक सदस्यता के लिए कोई अंशदान(सबस्क्रिप्शन) देय नहीं है।
  • सक्रिय सदस्य् से सदस्यता शुल्क एवं एक बार लिया जाने वाला अंशदान(सबस्क्रिप्शन) इस प्रकार है:
    • अधिकारियों/आश्रितों के लिए प्रवेश शुल्क रू. 200/+एक बार का सदस्यता शुल्क रू.500/
    • जेसीओ/आश्रितों के लिए प्रवेश शुल्क रू. 100 /+एक बार का अंशदान(सबस्क्रिप्शन) रू. 200/
    • एनसीओ / आश्रितों के लिए प्रवेश शुल्क रू. 50 / +एक बार का अंशदान(सबस्क्रिप्शन) रू. 100 /
    • अन्य. रैंक / आश्रितों के लिए प्रवेश शुल्क रू. 30 / + एक बार का अंशदान(सबस्क्रिप्शन) रू. 70 /
  • सीधे डिपॉजिट के लिए आईसीआईसीआई बैंक, डीएलएफ कुतुब प्लाजा शाखा, डीएलएफ सिटी, फेज 1, गुड़गांव 122002 (खाता सं- 629101103338) का उपयोग करें।

पीडीएफ में सदस्यता आवेदन पत्र संलग्न है

दान (DONATION)

​दान हमें सहर्ष स्वी़कार्य हैं।

सभी सदस्यों और गैर-सदस्यों से उदारतापूर्वक दान देने का आग्रह है।

आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत दान आयकर से मुक्त है।


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हकदारी (ENTITLEMENT)

सशस्त्र बलों के पेंशनभोगी / पेंशनभोगी परिवार

रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फ़रवरी,1972 के नीतिगत पत्र सं. 200847/ पेंशन-सी /71 का सारांश, जिसे वित्त मंत्रालय के 1972 (रक्षा_ 567/Addl FA (D) की समुचित सहमति है।

इस पत्र में निहित है -

"इस पत्र में पेंशन का विधान विशेष स्व रूप का है, जो भविष्य में वेतन और पेंशन संरचना में स्वीकृत किसी प्रकार के संशोधन/परिवर्तन के अधीन नहीं होगा। इन विशेष स्वीकृतियों के अलावा समय-समय पर अस्थायी और/या पेंशन में तदर्थ वृद्धि स्वीकार्य नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा नियमों और आदेशों के तहत और स्वीकार्य पेंशन स्वीकृति के अधिक अनुकूल होने पर इसके अंतर्गत, उच्च हकदारी की मंजूरी दी जाएगी। देय उच्ची हकदारी का भुगतान किया जाएगा और शेष राशि का तदर्थ भुगतान अनुदान के रूप में किया जाएगा।"
रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फ़रवरी, 1972 के पत्र के अनुलग्नतक I में क्रमश: बताया गया है:
“अधिकारी रैंक से नीचे के जो अधिकारी और कार्मिक विकलांगता के आधार पर सेवा से बाहर हो गए हैं, उन्हेंं विकलांगता पेंशन के बजाय सर्विस एवं विकलांगता तत्वों को शामिल करते हुए युद्ध अंग-भंग हेतु भुगतान दिया जाएगा।
सेवा तत्व , उस रैंक की अधिकतम सेवा हेतु, विकलांगता के समय के रैंक में सामान्य अवकाश ग्रहण करने पर देय पेंशन राशि के बराबर होगा। जेसीओ, अन्य रैंक एवं एनसी(ई) वेतन ग्रुप में, उक्त- द्वारा दी गई सेवा हेतु जो भुगतान दिया जा रहा था, उसकी समयावधि पर ध्यान दिए बिना, यह गणना की जाएगी।
100 प्रतिशत विकलांगता के मामले में विकलांगता तत्वों को सर्विस तत्व से घटाते हुए सैनिक द्वारा अंतिम आहरित परिलब्धियों के बराबर राशि होगी, जो रू. 500/- तक सीमित होगी।
20% या इससे अधिक आंकी गई विकलांगता वाले सैनिक को सेवा में बरकरार रखा जाता है और उसे बाद में सेवामुक्त किया जाता है। विकलांग/विकल सैनिक की सेवा निवृत्ति के समय, अंतिम रैंक की सेवा अवधि के संदर्भ में उसके सेवा तत्वों की गणना की जाएगी’’
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि विकलांगता के कारण सेवा से हटाए गए सभी अधिकारी जेसीओ एवं अन्य रैंक के वास्त विक सेवा पर ध्यान दिए बिना उच्चतम रैंक का समान सेवा तत्व उन्हें प्राप्त होगा।
विकलांगता तत्वों के बारे में विचार करते समय सैनिक द्वारा की गई सेवा के आधार पर भिन्नता हो सकती है। सेवा हेतु बरकरार रखे गए सैनिकों के सेवा तत्व, सेवानिवृत्ति के समय उनके रैंक में पेंशन पर आधारित होगा, जबकि विकलांगता तत्वत, अंग-भंगवाले रैंक पर आधारित होगा।

  1. भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, नई दिल्ली-110011 के दिनांक 11/11/2008 के पत्र संख्या 17(4)/2008(1)/डी(पेंशन/नीति) में युद्ध में घायल सैनिकों सहित पूर्व सैनिकों की संशोधित पेंशन हेतु 2006 के पूर्वपेंशन धारकों के लिए छठा वेतन आयोग लागू किया गया है। उक्ती पत्र में 1 जनवरी, 2006 से पेंशन वृद्धि की व्यवस्था की गई है।
  2. रक्षा मंत्रालय के दिनांक 31.01.2001 के पत्र संख्या 1(2)/डी(पेंशन-सी) के पैरा 7.2 में यथाप्रदत्त् अधिकारों के अंतर्गत ‘’ विकलांगता/युद्ध में अंग-भंग के प्रतिशत की व्यापक बैंडिंग की अवधारणा को रक्षा मंत्रालय के दिनांक 19 जनवरी, 2010 के पत्र संख्या 10(01)/डी(पेंशन/नीति)/खंड ।। द्वारा, विगत प्राधिकार में संशोधन करते हुए 01.01.1996 के पहले विकलांगता के कारण सेवा से हटाए गए सशस्त्र बलों के ऐसे अधिकारियों एवं पीबीओआर(PBOR) को भी प्रदान किया जाएगा, जिन्हें दिनांक 01.07.2009 को युद्ध में अंग-भंग पेंशन प्राप्त हो रहा है। उक्त पत्र से यह भी इंगित होता है कि रक्षा मंत्रालय के दिनांक 31.01.2001 के पत्र के पैरा 4.1 में ‘ई’ श्रेणी के विकलांगता वाले पेंशनभोगियों के मामले में आहरित अंतिम परिलब्धियों के संबंध में सशस्त्र बलों एवं पीबीओआर(PBOR) के अधिकारियों हेतु युद्ध में अंग-भंग पेंशन पर से दिनांक 01.07.2009 से रोक हटा ली जाएगी, फिर भी युद्ध में अंग-भंग पेंशन पाने वाले सैनिकों को सरकार के प्रारूप पर तीन प्रतियों में भरकर अपने-अपने पेंशन वितरक अधिकारी को भेजना होगा। युद्ध में अंग-भंग पेंशन के अतिरिक्त, संबंधित अधिकारी को सेवा निवृत्ति ग्रेच्युमटी पाने का भी हकदार होगा।
  3. दिनांक 15 फरवरी, 2011 के पत्र संख्या 17(4)/2008(1)/डी(पेंशन/नीति)/-खंड-V एवं रक्षा मंत्रालय के दिनांक 4-5-2009 के पैरा 2.3 से इंगित होता है कि संशोधित अंग-भंग तत्व दरें:
    1. युद्ध में शत-प्रतिशत विकलांगता हेतु के कारण हटाए जाने के मामले में शत-प्रतिशत से कम नहीं होंगी।
    2. लड़ाई/युद्ध में हताहत हुए सेवा निवृत्ति/हटाए गए सैनिकों के मामले में 100% अंग-भंग के लिए 60%
    3. सैन्य सेवा की परिस्थितियों के कारण विकलांग/विकल होने वाले सैनिकों के लिए 100% विकलांगता हेतु 30%।
    सशस्त्र बल के कार्मिकों की सेवा-निवृत्ति/सेवा मुक्ति/100% अपगंता के समय संशोधित वेतन की संरचना में वेतन बैंड सहित ग्रेड पे, सेन्य सेवा वेतन, पूर्व समूह वेतन (जहां प्रयोज्यक हो)/न्यू नतम वेतन, एचएजी एवं इससे ऊपर के वेतन मान में न्यू नतम वेतन। 100% से कम विकलांगता के मामलों में विकलांगता तत्व को सेवा अवधि और पहले से स्वीकार्य विकलांगता स्तर के अनुपात में कम कर दिया जाएगा।
    सेवा तत्व (रक्षा मंत्रालय के दिनांक 04.05.2009 के पत्र के पैरा 2.1 में संशोधित) और युद्ध में चोट-चपेट तत्व का योग, सशस्त्र बल के कार्मिकों की सेवा-निवृत्ति/सेवा मुक्ति/विकलांगता के समय पूर्व संशोधित वेतनमान के अनुरूप, दिनांक 01.01.2006 से संशोधित वेतनमान संरचना में वेतन बैंड सहित ग्रेड पे, सैन्य सेवा वेतन, पूर्व समूह वेतन (जहां प्रयोज्य हो)/न्यूनतम वेतन, एचएजी एवं इससे ऊपर के वेतनतमान में न्यूनतम वेतन से अधिक नहीं होगा। दिनांक 01.01.2006 से लागू संशोधित न्यूनतम वेतनमान के संदर्भ में युद्ध में चोट-चपेट संबंधी पेंशन के योग की सीमा, यथा उल्लिखित दिनांक 01.07.2009 से हटा ली जाएगी।
  4. अंग-भंग पेंशन का अस्वी करण
    विकलांगता पेंशन अस्वीकृत कर दिए जाने पर यदि संबंधित सैनिक को लगता है कि उसके मामले में उसकी विकलांगता सेवा के कारण है, तो वह रिकॉर्ड आफिस के माध्यम से 6 महीने के भीतर सरकार से इसके लिए अपील कर सकता है। इसी प्रकार यदि पारिवारिक पेंशन अस्वी कृत कर दी जाए, तो मृतक के परिवार वाले इसके लिए अपील कर सकते हैं।
  5. शिकायत
    यदि ऐसी किसी समस्या के लिए पीसीडीए (पी) के कार्यालय को प्रतिवेदन देना हो, तो अपनी समस्या / शिकायत के पूर्ण विवरण के साथ निम्नलिखित जानकारी / ब्यौरे कृपया उपलब्धी कराएं। ऑनलाइन, ई-मेल या डाक द्वारा कोई शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
    • नाम, रेजीमेंट संख्या, जहां से सेवा निवृत्त हुए वहां का रिकॉर्ड ऑफिस/एच.ओ.ओ.
    • पी.पी.ओ. संख्या और तारीख, जिसके तहत आपको पेंशन देय हुई
    • बचत खाता/चालू खाता संख्या सहित जिस पी.डी.ए./बैंक से पेंशन आहरित किया जा रहा है, उसका नाम
    • आपको आवंटित टीएस/पीएस/एचओ नंबर (डीपीडीओ, कोषागार, डाकघर और पीएओ होने पर)।
  6. सतत उपस्थिति भत्ता
    मेडिकल बोर्ड द्वारा इस भत्ते की सिफारिश की जाती है और रैंक के बारे में ध्याान दिए बगैर यह रू.3000/- है। संशोधित वेतन बैंड पर देय महंगाई भत्ता, जितनी बार 50% होगा, उतनी बार इसमें 25% की वृद्धि होगी। वर्तमान दर रू.3750/- प्रतिमाह है। रक्षा मंत्रालय के दिनांक 5 मई, 2009 के पत्र संख्या 16(6)/2008(2)डी(पेंशन/नीति) का संदर्भ लें।

युद्ध में चोट-चपेट के कारण विकलांगता पेंशन

  1. सेवा में विकलांगता की तारीख को वेतन के आधार पर सेवा तत्व, सेवा पेंशन के बराबर होगा, जिसके लिए वो हकदार होता, परंतु देय अधिभार सहित सामान्य कोर्स में उस रैंक में उसकी सेवा‍ निवृत्ति की तारीख तक सेवा की गणना की जाएगी। यह तत्व अर्जित करने हेतु कोई न्यूनतम अर्हक सेवाशर्त नहीं होगी।
  2. युद्ध में अंग-भंग के कारण सेवा से हटाए गए सैनिकों के विकलांगता तत्व की गणना इस प्रकार की जाएगी:

  3. विकलांगता मेडिकल बोर्ड द्वारा अंग-भंग प्रतिशत का निर्धारण युद्ध में अंग-भंग के प्रतिशत की गणना
    50 से कम 50
    50 से 75 के बीच 75
    76 से 100 के बीच 100

सेवा में बरकरार रहने पर युद्ध में चोट-चपेट संबंधी पेंशन

उपरोक्त परिस्थितयों में युद्ध में चोट-चपेट लगने के कारण, विकलांगता के बावजूद, सेवा में बरकरार रहने एवं बाद में सेवा निवृत्त होने वाले सैनिकों को सरकार द्वारा समय-समय पर, निर्धारित समयावधि में निम्नत विकल्प का चयन करना होगा:

  1. बाद में सेवा मुक्त् होने के समय युद्ध में अंग-भंग तत्व को छोड़ते हुए उसके एवज में एकमुश्त मुआवजा लेना; या
  2. वेतन के 60% की दर से एकमुश्त मुआवजा छोड़ते हुए देय सेवा पेंशन के अतिरिक्त ,सेवा मुक्ति के समय युद्ध में अंग-भंग तत्व लेना।

नेत्रहीन सैनिकों हेतु विशेष पेंशन

सैन्य. सेवा के परिणामस्वरूप यदि कोई पूर्व सैनिक पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण अपनी आजीविका कमाने से वंचित रह जाए, तो मेरिट के आधार पर उसे रू. 500/- प्रतिमाह विशेष पेंशन दी जाती है, जो उसकी सामान्य विकलांगता पेंशन के अतिरिक्त है। प्रत्येक मामले में विशेष पेंशन की स्वीकृति, प्रधान सीडीए (पी) इलाहाबाद के माध्यम से रिकार्ड अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय द्वारा की जाती है। उपरोक्तर स्वीककृति के आधार पर प्रधान सीडीए (पी) इलाहाबाद द्वारा पीपीओ के माध्यम से विशेष पेंशन अधिसूचित की जाती है। भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय का दिनांक 16.11.2001 का पत्र संख्या 12 एसबी(8)/52-2001/958/डी(आरईएस)।
सैन्य सेवा के परिणामस्वरूप यदि कोई सैनिक पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण अपनी आजीविका कमाने से वंचित रह जाए, तो उसे विशेष पेंशन देय होगी, बशर्ते निम्न शर्तें पूरी होती हों: -

  1. पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण सैनिक को सेवा से हटा दिया गया हो।
  2. नेत्रहीनता के कारण उसे पहले से ही विशेष पेंशन न मिल रही हो।
  3. उसे विकलांगता पेंशन मिल रही हो।
  4. सैन्य सेवा में नेत्रहीनता स्वीकार्य है, जिसका निर्धारण 40% अथवा उससे अधिक किया जाता है।

 


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महत्वपूर्ण आदेश एवं परिपत्र ( important ORDERS & CIRCULARS)

  1. परिपत्र संख्या 574: 7 वीं केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के कार्यान्वयन पर स्पष्टीकरण
  2. परिपत्र संख्या 570: प्री-2016 रक्षा बलों पेंशनरों / परिवार पेंशनरों की पेंशन की सातवीं केन्द्रीय वेतन आयोग संशोधन की सिफारिशों पर सरकार के फैसले का क्रियान्वयन।
  3. Circular No. 568 : प्री -2006 पेंशनरों (जेसीओ / अन्य रैंकों की पेंशन में संशोधन और कमीशन अधिकारी) - संशोधित पेंशन के लिए 33 वर्ष की अर्हक सेवा का अलगाव।
  4. परिपत्र संख्या 565: 006 के पहले सशस्त्र मजबूर अधिकारी और जेसीओ / अन्य रैंकों पेंशनरों / परिवार पेंशनरों के संबंध में हताहत पेंशन पुरस्कारों का अवतरण
  5. परिपत्र संख्या 555: ओआरओपी पर पीसीडीए (पी) परिपत्र 555
  6. 2. रियायत पाने के लिए रेलवे की सूची और आवश्यक प्रमाणपत्र       (डाउनलोड रियायत प्रमाणपत्र)
  7. परिपत्र संख्या 549 : पीसीडीए का परिपत्र
  8. परिपत्र संख्या 548 : 2006 के पहले कमीशन प्राप्त पेंशनभोगी अधिकारी/पेंशनभोगी परिवारों की पेंशन में संशोधन।
  9. परिपत्र संख्या 547 : 2006 के पहले जेसीओ/अन्यरैंक के पेंशनभोगियों/परिवारिक पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन।
  10. परिपत्र संख्या 542 : सीएससी -2012 की सिफारिश के अनुरूप युद्ध में चोट-चपेट के कारण विकलांगता हेतु न्यूनतम गारंटि पेंशन
  11. परिपत्र संख्याप 529 : दिनांक 01.01.1996 के पूर्व विकलांगता के आधार पर सेवा से हटाए जाने वाले अधिकारी रैंक (पीबीबोआर) के नीचे के सशस्त्र बलों के अधिकारियों एवं कार्मिकों हेतु अंग-भंग पेंशन संबंधी निर्णय का युक्तिकरण: विकलांगता/ युद्धमें चोट-चपेट के प्रतिशत के व्यापक बैंडिंग के लाभ का विस्तार।
  12. परिपत्र संख्यास 508 : 2006 के पूर्व सशस्त्र बलों के जेसीओ/अन्य रैंक एवं समकक्ष पदों हेतु अंग-भंग संबंधी पेंशन में सुधार के लिए रक्षा सेवा कार्मिक एवं पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दोंपर सचिवों की समिति 2012 की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन।
  13. परिपत्र संख्या 502: 2006 के पूर्व जेसीओ/अन्य रैंकों के पारिवारिक पेंशन भोगियों के मामले में सामान्य पारिवारिक पेंशन में वृद्धि-रक्षा सेवा कार्मिक एवं पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सचिवों की समिति 2012 की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन।
  14. परिपत्र संख्या 501 : दिनांक 01.01.2006 के पूर्व सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त/सेवा मुक्त /विकलांगता के कारण सेवा से निकाले गए जेसीओ/अन्य रैंकों के पेंशन में सुधार-रक्षा सेवा कार्मिक एवं पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दे पर सचिवों की समिति 2012 की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन।
  15. परिपत्र संख्या 456 : सेवाकाल के दौरान दिनांक 01.01.2006 के पूर्व मृत्युा/विकलांगता के मामले में विशेषलाभ- छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन।
  16. परिपत्र संख्या 433 : दिनांक 01.01.2006 को अथवा इसके बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति/सेवा मुक्त किए जाने हेतु सशस्त्र बलों के अधिकारियों और पीबीओआर के अनुरोध पर विकलांगता/युद्ध मेंचोट-चपेट पेंशन से जुड़े पेंशन विनियमन संबंधी प्रावधानों में संशोधन-छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन।
  17. परिपत्र संख्या 429 : कैबिनेट सचिव समिति की रिपोर्ट- सशस्त्र बलों के अधिकारियों और पीबीओआर के पेंशन भोगियों के मामले में विकलांगता/युद्ध में चोट-चपेट तत्व में संशोधन।
  18. परिपत्र संख्याव 428 : 2006 के पूर्व लेफ्टीनेंट जनरल एवं समकक्ष पदों के मामले में पेंशन संशोधन- छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन
  19. सिविल अपील संख्या 418: सिविल अपीलीय अधिकार क्षेत्र में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में
  20. परिपत्र संख्या 412 : 2006 के पूर्व सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) से सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन/परिवारिक पेंशन में संशोधन- छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन
  21. परिपत्र संख्या 403 : शुद्धिपत्र - 2006 के पूर्व पेंशन दिनांक 02-02-2009
  22. परिपत्र संख्या 401 : शुद्धिपत्र – 2006 के पूर्व पेंशन दिनांक 18-12-2008
  23. परिपत्र संख्या7 397 : 2006 के पूर्व सशस्त्र बलों के पेंशन/परिवारिक पेंशन का समेकन- छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर सरकार के निर्णय का कार्यान्वयन

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विशेष कल्याण संबंधी हकदारियां (SPECIAL WELFARE ENTITLEMENTS)

आयकर छूट

विकलांग/विकल पेंशनभोगियों के पूरे पेंशन पर आयकर छूट

विकलांगता की श्रेणी में आने वाले पेंशनभोगियों की पूरी पेंशन, अर्थात सेवा तत्व (सेवा पेंशन) एवं विकलांगता तत्व्, आयकर मुक्त है। विकलांगता पेंशन में दो तत्व( होते हैं- सेवा तत्वक, जो सेवा की अवधि के अनुसार प्रदान किया जाता है (बशर्ते सेवा की अवधि पेंशन योग्य से कम होने पर न्यू नतम राशि) और विकलांगता तत्व, विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर प्रदान किया जाता है। सेवा अथवा विकलांगता तत्वों हेतु कोई न्यूनतम अर्हक सेवा निर्धारित नहीं की गई है, फिर भी यदि किसी सैनिक की एक दिन की सेवा है, तो उसे विकलांगता पेंशन पाने का हक है। पेंशन हेतु न्यू नतम अर्हक सेवापूरी करने वाले सैनिकों की विकलांगता पेंशन के उद्देश्यश से सेवा तत्व ही उनका सर्विस पेंशन बन जाता है। दोनों तत्वों और उनके बकाया(ऐरियर) आयकर मुक्त हैं, जिसके बारे में स्पष्टीकरण वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के दिनांक 02 जुलाई, 2001 के निदेश संख्याा 2/2001 एवं दिनांक 14 जनवरी, 1970 के निदेश संख्याा 136 द्वारा स्पष्ट किया गया है। ये दोनों निदेश नीचे देखे जा सकते हैं।

 

निदेश संख्या 136 
एफ संख्या 34/3/68-आईटी(एआई)
भारत सरकार
केंद्रीय प्रत्य्क्ष कर बोर्ड
नई दिल्ली, दिनांक 14 जनवरी, 1970
प्रेषक: श्री एस.एन. नौटियाल
सचिव, सीटीडीटी
सेवा में- सभी आयकर आयुक्त्
विषय: छूट- भारतीय सेना के विकलांग/विकल अधिकारियों को प्रदत्ते विकलांगता पेंशन के सेवा एवं विकलांगता तत्व को क्या् आयकर मुक्त रखा जाए।
उपरोक्त विषय पर बोर्ड के दिनांक 5 सितम्बर, 1960 के पत्र संख्या एफ42/9/59-आईटी (एआई) का संदर्भ लें, जिसमें उल्ले ख किया गया था कि वित्त विभाग की दिनांक 21.03.1992 की अधिसूचना संख्या 878-एफ(आयकर) की मद 29 के अंतर्गत आने वाले मामलों में भारतीय सेना के किसी अधिकारी द्वारा प्राप्त् विकलांगता पेंशन के ‘विकलांगता तत्व’ को आयकर से मुक्त रखा जाएगा, जबकि ‘सेवा तत्व‍’आयकर के अधीन होगा।  
2. इस मामले पर कानून मंत्रालय के साथ पुनर्विचार के उपरांत बोर्ड को परामर्श दिया जाता है कि अधिसूचित मद 29 के अंतर्गत आने वाले पेंशन के प्रकार के बीच अंतर नहीं है। तदनुसार, उपरोक्त अधिसूचना की मद 29 के अंतर्गत आने वाले मामलों में, पूरी विकलांगता पेंशन आयकर मुक्त रखी जाएगी।  
3. उपरोक्त निदेश अधीनस्थ सभी आंकलन अधिकारियों के ध्यान में लाया जाए
भवदीय,  
हस्ता्क्षरित/- (एस.एन. नौटियाल)
सचिव सीबीडीटी

 

निदेश संख्या 2/2001

एफ संख्या 200/51/99 -आईटीएआई
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
सेवा में सभी आयकर आयुक्त
नई दिल्ली, दिनांक 2 जुलाई, 2001
सेवा में- सभी मुख्य आयकर आयुक्त/सभी आयकर महानिदेशक

विषय:भारतीय सेना में विकलांगता की श्रेणी में आने वाले किसी अधिकारी की विकलांगता पेंशन अर्थात ‘’विकलांगता तत्व’’ एवं ‘’सेवा तत्व ’’ से आयकर छूट के संबंध में निदेश  
महोदय,
भारतीय सशस्त्र बल के विकलांग/विकल अधिकारी की विकलांगता पेंशन अर्थात ‘’विकलांगता तत्वग’’ एवं ‘’सेवा तत्व ’’से आयकर छूट दिए जाने के संबंध में बोर्ड को संदर्भ प्राप्त हुए हैं।
2. ऐसा लगता है कि बोर्ड के दिनांक 14 जनवरी, 1970 निदेश संख्या 136 (एफ सं. 34/3/68-।।(एआई)) के बावजूद कुछ मामलों में फील्ड संरचनाएं, विकलांगता पेंशन की अनुमति नहीं दे रहे हैं। 
3. बोर्ड में इस मामले की फिर से जांच की गई और यह पुन: कहने का निर्णय लिया गया है कि भारतीय सशस्त्र बलों के किसी विकलांग/विकल अधिकारी की पूरी विकलांगता पेंशन, अर्थात विकलांगता तत्व और सेवा तत्व आयकर मुक्त होगी। 
4. यह जानकारी, अधीनस्थ कार्यरत सभी अधिकारियों के संज्ञान में लाई जाए।
भवदीय
हस्ता क्षरित /- (बी एल साहू) 
ओएसडी (आईटीए-आई)

  1. टेलीफोन
    शौर्य पुरस्कार विजेताओं, युद्ध विधवाओं और विकलांग/विकल सैनिकों को प्राथमिकता के आधार पर टेलीफोन आवंटन। भारत सरकार, संचार मंत्रालय के दिनांक 01.09.2000 के पत्र संख्या 2-47/97-पीएचए द्वारा कनेक्शन में प्राथमिकता के अतिरिक्त पंजीकरण शुल्क के भुगतान से छूट और मासिक किराये में 50% की रियायत प्रदान की गई है।
  2. ईसीएचएस नामांकन शुल्क में छूट
  3. रेलवे की रियायतें- रेलवे द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर परिचर (अटेंडेंट) साथ ले जाने सहित 75% की छूट। छूट की श्रेणियाँ रेलवे वेबसाइट पर सूचीबद्ध हैं।
  4. एयरलाइन्स में मूल हवाई किराए में रियायत। एयर इंडिया के लिए, युद्ध में विकलांग/विकल हुए अधिकारी को एमपी 5 जबकि अन्य रैंक के लिए संबंधित रिकॉर्ड से पहचान पत्र प्राप्त करनी होती है।
  5. वरिष्ठ विकलांग/विकल सैनिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति।

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प्रमुख उपलब्धियां (MAJOR ACHIEVEMENTS)

  1. ​रक्षा मंत्रालय द्वारा डिसेबल्ड वार वेटरन्स (इंडिया) विकल युद्धवीर को मान्यता प्राप्त एसोसिएशन के रूप में स्वीकृति।​
  2. ​​युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों हेतु विशेष पहचानपत्र जारी करना।
  3. युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों और उनके आश्रितों को पेंशन और संबद्ध लाभ के संदर्भ में उपयुक्त देय राशि दिलाने में मदद।
  4. ​युद्ध में चोट- चपेट संबंधी पेंशन पर गणना योग्य परिलब्धियों(emoluments) से शत-प्रतिशत प्रतिबंध हटाते समय अंतिम आहरित भुगतान के 150% तक पेंशन का हक देना (100% विकलांगता के लिए)
  5. ​युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों के लिए ईसीएचएस नामांकन शुल्क की छूट।
  6. ईसीएचएस पालीक्लिनिक में चिकित्सा उपचार में प्राथमिकता के लिए युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिक और उनके जीवन साथी के लिए अलग से ईसीएचएस वाइट कार्ड ।
  7. ​सैन्य अस्पतालों में युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों और उनके जीवन साथी की प्राथमिकता के साथ उपचार।
  8. वार वेटरन्स की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजना में संशोधन और परिवर्तन (modified and revised)।
  9. आईआरसीटीसी की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग में रेलवे की रियायत।
  10. ​युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों को ट्रेन से यात्रा करने हेतु शताब्दी, राजधानी और अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों सहित आईआरसीटीसी की वेबसाइट में बताए अनुसार रेलवे की रियायत/छूट।
  11. ​​एयर इंडिया द्वारा हवाई यात्रा में अधिकाधिक प्रतिशत की रियायत।
  12. ​टेलीफोन किराये में छूट।
  13. ​सीएसडी कैंटीन में विकलांग / विकल सैनिकों के लिए विशेष काउंटर।
  14. ​युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों की  अशक्तों के लिए 01.01.96 से ब्रॉड बैंडिंग(Broad Banding)।
  15. ​पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग(डीओपीपीडब्यू) की स्थायी समिति के सदस्य के रूप में सलाहकार का दर्जा। (कार्यालय उपकरण एवं डीओपीपीडब्यू से अनुदान की प्राप्ति)​
  16. ​पूर्व सैनिक कल्याण विभाग की परामर्शदात्री बैठकों में स्थायीरूप से आमंत्रण।
  17. सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग के समक्ष विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों से संबंधित मुद्दों की प्रस्तुति।
  18. समय समय पर पेंशन वृद्धि के संशोधन होने पर परिपत्र (circular) जारी करने पर हर बार अनुबंध (annexure) की मांग पर रोक लगा दी गयी |
  19. विकल एवं विकलांग के लिए संशोधित कारों को चलने हेतु विकल एवं विकलांगो को लाइसेंस प्रदान करने के लिए मोटर वाहन अधिनियम में परिवर्तन स्वीकृत हो गया |
  20. एन्डोलाइट (endilite) एवं ओटोबॉक (otto bock) कृत्रिम अंग को ई.सी.एच.एस (ECHS) के पैनल में शामिल अथवा संलग्न किया गया |

वर्तमान में उठाए गए मुद्दे

  1. युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों/लड़ाई में हताहत हुए मृत सैनिकों की विधवाओं के पेंशन में युद्ध चोट-चपेट तत्वों (disability elements) को शामिल करना।
  2. युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों पर प्रतिकूल असर डालने वाली ओआरओपी(one rank one pension) विसंगतियां।
  3. सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष विकलांगता के शेष मुद्दों पर प्रतिवेदन।
  4. निम्न पर एएफटी मामले–
    1. युद्ध में विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों को सेवा से निकाले जाने वाले रैंक की अधिकतम सेवा हेतु सेवा तत्व और
    2. दिनांक 1.1.96 से सभी विकलांग/विकल पूर्व सैनिकों के लिए प्रतिशत के आधार पर विकलांगता तत्व।

गतिविधियां

    डिसेबल्ड वार वेटरन्स (इंडिया), विगत वर्षों में खासतौर पर युद्ध में अथवा अन्यत प्रकार के विकल/विकलांग सैनिकों से जुड़े इन मामलों को सुलझाने में जुटा है:
  1. युद्ध में विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों के हकों के बारे में 7वें वेतन आयोग को प्रतिवेदन देना, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा है।
  2. पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा परिपत्र सं 555 के कारण लेफ्टीनेंट, कैप्टेन, मेजर और सिपाही की पेंशन संबंधी विसंगतियों के बारे में न्यायिक आयोग के समक्ष पुरजोर ढंग से उठाया गया। न्यानयमूर्ति रेड्डी से हमारी मुलाकात तथा उन्हें तथ्यों से अवगत कराने के उपरांत उन्होंने स्वीकार किया कि वेतन के 50% फार्मूले पर पेंशन की काल्पानिक (नोशनल) राशि से पेंशन की शुरूआत होनी चाहिए।
  3. इसी मुद्दे से संबंधित प्रतिवेदन माननीय रक्षा मंत्री को दिनांक 1 जुलाई, 2016 को दिया गया और हमें आशा है कि इसके सकारात्ममक परिणाम निकलेंगे।
  4. युद्ध में विकल / विकलांग सैनिकों की विधवाओं एवं आशक्तता के आधार पर सेवामुक़्त किए गए पूर्व सैनिकों के पेंशन हेतु अशक्तता व सेवा घटक को समेकित करते हुए इनकी पेंशन बढ़ाने की हमारी बहुप्रतीक्षित मांग निरंतर जारी है। सातवें वेतन आयोग तथा रक्षा मंत्रालय द्वारा यह मांग ठुकराए जाने के बाद इस मुद्दे को हमने स्कोवा की 28वीं बैठक में एक बार फिर उठाया और सुखद पहलू यह है कि यह मुद्दा एक बार विचारार्थ खुल गया है। हमने जिक्र किया था कि सभी विकल/विकलांगों को इसमें शामिल करके रक्षा मंत्रालय ने हमारे मामले को गलत परिप्रेक्ष्य में लिया है। स्कोवा की 28वीं बैठक में हमने इस मुद्दे को उठाया, जिसके फलस्वलरूप यह मुद्दा विचारार्थ खुल सका। बैठक में भाग ले रहे संयुक्त सचिव (खर्च) ने अध्यक्ष महोदय को सूचित किया गया कि यदि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह मुद्दा अग्रेषित किया गया, तो वे शीघ्र ही इसकी मंजूरी दे देंगे।इस मुद्दे पर माननीय रक्षा मंत्री को दिनांक 1 जुलाई, 2016 को एक बार फिर प्रतिवेदन दिया गया और हमें आशा है कि यह मुद्दा सही दिशा में है।
  5. पी.सी.डी.ए (पी) ने रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24-02-1972 के पत्रांक 200487/पेंशन-सी/71 को नजरअंदाज कर दिया,जिसे विशेष छूट के रूप में जारी करते हुए निर्धारित किया गया था कि ‘’सेवा घटक, मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति उपदान सहित सामान्य अवकाश ग्रहण की पेंशन के बराबर की हकदारी होगी।’’उपर्युक्त्त को संशोधित करते हुए 2001 में तदन्तदर आदेश जारी किए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा तैयार ड्राफ्ट गवरमेंट लेटर(DGL)से अशक्तता के कारण सेवा मुक़्त किए गए विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों को सही हकदारी से बाहर रखा गया।जब इसे माननीय रक्षा मंत्री के समक्ष रखा गया, तो उन्होंने इसका समाधान करने हेतु सहमति दी।
  6. रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फरवरी, 1972 के पत्रांक 200847/पेंशन-सी/71 को नजरअंदाज करते हुए वास्तविक सेवा पर पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा तैयार किए गए सरकारी मसौदा पत्र के आधार पर रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ओ आर ओ पी के आदेश जारी किए गए हैं। इससे युद्धमें विकल/विकलांग सैनिक की विधवाओं और विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों की पेंशन वृद्धि की संभावनाएं पूरी तरह से समाप्त हो गईं हैं। माननीय रक्षा मंत्री ने इस चूक को दूर किए जाने हेतु अपनी सहमति दी है।
  7. रैंक की अधिकतम सेवा के आधार पर सेवा घटक की गणना करने के मुद्दे को स्वीकार कर लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के पत्र के आधार पर हमारे प्राधिकार के बारे में पी.सी.डी.ए (पी) के परिपत्र सं. 560 के पैरा 4 (एच) में इसके बारे में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
  8. विकलांगता के बाद सेवा में बने रहे सैनिकों के ब्रॉड बैंडिंग के मुद्दे को माननीय रक्षा मंत्री के साथ उठाया गया है। संयुक्ति सचिव(ESW )ने आशवस्त किया है कि वित्त मंत्रालय (व्यय) द्वारा अनुमोदन मिलते ही, आवश्यक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
  9. संस्था को इसके स्थायी कार्यालय C6-18/1 सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया, नई दिल्ली 110016 में शिफ्ट कर दिया गया है।
  10. वर्ष 1987 तक युद्ध में विकलांगों को एक अलग श्रेणी में रखा गया था और उसके बाद उन्हें सेवामुक़्त किए गए अन्य विकलांग पेंशनधारियों के साथ मिला दिया गया। यह वह अवधि थी, जब अशक्ततता को स्वी्कार नहीं किया जाता था। इस विलय के परिणामस्वरूप, ऐसे विकलांग सैनिकों को दी जाने वाली प्राथमिकता बंद कर दी गई। हमने इस मुद्दे का माननीय रक्षा मंत्री के समक्ष उठाया है। हम आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि विशिष्टता की हमारी यह श्रेणी बहाल की जाएगी।
  11. डिवावे ने युद्ध वीर टाइम्स के नाम से पत्रिका शुरू की है जो छप रही है, शीघ्र ही सदस्यों को प्राप्त हो जाएगी ।

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